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بقلم رنا احمد
الفصل 2 — رواية ابناء الجبالي الفصل الثاني 2 - بقلم رنا احمد
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عن الرواية
في ڤيلا الجبالي في مكتب الجد حسن كان قاعد ادهم وهو ماسك الأوراق ومصدوم من اللي فيها. "إيه ده يا جدي، حضرتك كتبت كل حاجة باسمي ليه؟ مش فاهم." وقف حسن بهيبة. "اسمع يا حديدي، ده زين يا ادهم يا ولدي. أنا شربت المر عشان أعمل الثروة دي كلها ومش هسمح إنها تضيع، وانت أنسب واحد يكون مسؤول عن كل ده." ادهم بقلق. "أرجوك يا جدي بلاش أنا بالذات، أنت عارف إني أصلاً مش من العيلة و..." حسن بغضب. "أنا قُلت لك جبل سابق، انسى موضوع الملجأ دي، انت ابن الجبالي وحفيدي، فاهم ولا لأ؟ والموضوع خلاص لحد كده انتهى، الحديد...
رواية ابناء الجبالي الفصل الثاني 2 - بقلم رنا احمد
في ڤيلا الجبالي، ساد الصدمة على الجميع.
ابتسم جميل فقط عندما عرف ما يدور في عقل صاحبه.
"جدي، ممكن أفهم إيه اللي سمعته ده؟ هتكون مرات مين؟" سأل سليم بانفعال.
رد حسن بنبرة غير قابلة للنقاش: "مراتك أنت يا سليم، والموضوع ده مفيش فيه نقاش. أنت خابر زين إن فيه قرارات مبحبش حد يناقشني فيها."
"لا يا جدي، آسف بس دي حياتي أنا. أنا مستحيل أوافق على كده، ده هبل!" قال سليم بغضب.
صفعة قوية تلقاها سليم من حسن، صدمت الكل.
"چاك، اقطع لسانك لما تقول على چدك أهبل أو بيقول كلام هبل!" صرخ حسن بصوت عالٍ.
"أنا آسف يا جدي، حقك عليا. بس أنت بتطلب مني المستحيل، أتزوج واحدة معرفهاش. طب فهمني دماغك." قال سليم باعتذار وأسف.
"الكلام خلص لحد كده." قال حسن بحدة.
"لا مخلصش، هو أنا إيه؟ لعبة في إيديكم تقرروا مصيرها على كيفكم؟ أنا مستحيل أوافق على الكلام ده." قالت داليا بدموع وقهرة.
جرت داليا خارج الڤيلا.
"روح وراها. حياتك قصاد دمعة واحدة ممكن تنزل منها يا سليم." قال حسن بحدة لسليم.
جري سليم وراها وهو مش فاهم ليه جده بيعمل كده.
في الشركة، كانت حياه جالسة بدموع. دخل ريان بغضب.
"بقا كده يا روح أمك، عملالي فيها شريفة وبتشتكيني لأدهم باشا؟ طب اعملي حسابك إن ده آخر يوم ليكي في الشركة يا ست حضرة."
"أبوس إيدك يا ريان بيه، أنا بت غلبانة مش قدك. أنت عارف ظروفنا، أبويا لو قعدت من الشغل مش بعيد يرميني في الشارع." قالت حياه بدموع.
قرب منها ريان بخبث.
"توتو، تصدقي صعبتي عليا؟ طب ما دام كده، ليه العند؟ اللي أنتِ عايزاه هتخديه."
بعدت حياه وتعصبت.
"لا، إزاي؟ كان كده؟ ملعون أبو الشغل على يجي بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ...
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بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... 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بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... ب
بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... 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